एपिसोड रूही और मनीष के आंसुओं से शुरू होता है, जो उन्हें अक्षरा की विदाई का दुखद समय याद करते हैं।

डॉक्टर, नर्स, अरमान, मिस्टर किपलिंग, और अन्य लोग अक्षरा के अंतिम संस्कार करते हैं, जो एक भावनापूर्ण पल है।

पुजारी अरमान से अक्षरा की चिता को आग लगाने के लिए कहते हैं, लेकिन अरमान अविला को यह कार्य करने का सुझाव देता है।

अविला अक्षरा की चिता के पास पहुंचता है और एक यादगार पल को साझा करता है, जब वह और अक्षरा ने एक-दूसरे को गले लगाया था।

विला को अक्षरा के साथ के पलों का याद आता है, जो उन्होंने एक ट्रेन में बिताए थे।

अविला को यह पता चलता है कि उसका कंटेनर छीन लिया गया था, जिससे उसकी परेशानी बढ़ती है।

पुजारी चिता को जलाने के लिए तैयार होते हैं, लेकिन अरमान उन्हें अविला को इस कार्य को करने का मौका देने की प्रस्तावना करता है।

अक्षरा की चिता जलती है, जिससे अबीरा की दुनिया एकदम खामोश हो जाती है और अमन आँसू बहाता है।