एपिसोड की शुरुआत में, अक्षरा और आरोही का दृढ़ संकल्प होता है, जिससे यह स्थिति तैयार होती है।

स्वर्णा अक्षरा द्वारा उठाई जाती है, जबकि सुजीत आरोही के साथ छेड़छाड़ करने की कोशिश करते हैं।

अक्षरा ने सुजीत की पूरी कोशिश को रोक दिया और उसे डाटते हुए खंजर चलाया।

सुजीत को अक्षरा के खंजर से चौंक जाता है, और फिर आरोही उसे थप्पड़ मारती है।

आरोही की तेज आवाज से सबका ध्यान बटोरा जाता है, और सुजीत के गाल पर गाली गिराती है।

मंजरी और महिमा आरोही से कहती हैं कि वह सुजीत को मारने की कोशिश करें।

अक्षरा उन्हें बताती है कि उनके भाई ने उनके साथ छेड़छाड़ की है और उनके साथ शर्मिंदगी में कानूनी कदम उठाने की आवश्यकता है।

सुजीत फिर से अपने निर्दोष बनने का दिखावा करता है और आरोही को अपनी बेटी की तरह समझता है।

आरोही उसे पिता-बेटी के रिश्ते का अपमान नहीं करने देती है।

आरोही का दावा है कि उसके भाई ने उसके साथ छेड़छाड़ की है, जिससे सभी को हैरानी होती है।