प्रारंभिक संवाद: राधा और मोहन, गाड़ी से निकलकर आने वाले गुंडों से घबराते हैं।

दौड़ का संघर्ष: उनकी भागने की कोशिश में, गुंडे उन्हें पकड़ लेते हैं, लेकिन मोहन ने उन्हें प्रहार किया।

मोहन की सलाह: मोहन राधा को समझाते हैं कि वह दामिनी से दूर भाग जाए, ताकि वह उसे कुछ न कर सके।

दामिनी की धमकी: दामिनी, गुस्से में, बंदूक निकालकर राधा की ओर निशाना लेती है।

उत्तरदायित्व की भावना: मोहन को अपने जीवनसंगी की सुरक्षा के लिए उसके बीच खड़े होकर उस गोली से बचाने का तय करते हैं।

राधा का निर्णय: मोहन की सलाह को मानकर, राधा उसकी इच्छानुसार दूर भागती है।

कठिन विचार: राधा को मोहन के साथ रहने की अग्रसन्धि से लड़ना पड़ता है, क्योंकि उसे पता है कि दामिनी उसको मार सकती है।

दामिनी की खबर: दामिनी ने बंदूक निकाली है और राधा की ओर निशाना लिया है, जैसे ही वह गोली चलाने की कोशिश करती है।

हीरोइक चरण: मोहन, राधा को बचाने के लिए उस गोली की ओर दौड़ते हैं और उसे बचाने में कامयाब होते हैं।

निर्णय का समय: अब राधा के सामने दो विकल्प हैं - क्या वह मदद के लिए दौड़ेगी या फिर मोहन को छोड़ने के लिए दामिनी से लड़ेगी?