भगवान शिव को त्रिदेवों में से एक माना जाता है, जो ब्रह्मा, विष्णु, और महेश के रूप में पूजे जाते हैं।

भगवान शिव की कई पौराणिक कथाएं हैं, जो उनके विभिन्न रूपों और कार्यों को वर्णित करती हैं।

भगवान शिव को 'महाकाल' कहा जाता है, जो समय के प्रति उनके नियंत्रण को संकेत करता है।

नीलकंठ शिव: – इस रूप में उनका गला नीला हो जाता है, जब वह समुद्र मंथन के समय हलाहल विष को पी लेते हैं।

भगवान शिव की पूजा: – महाशिवरात्रि जैसे त्योहारों में भगवान शिव की विशेष पूजा की जाती है, जिसमें शिवलिंग का पूजन और भक्ति होती है।

भगवान शिव के रूप: – भगवान शिव के विभिन्न रूपों में जैसे कि भैरव, रुद्र, गिरिजा पति का अध्ययन करने से हम उनकी विशेषताओं को समझ सकते हैं।

भगवान शिव की गुणगान: – भगवान शिव की अनंत कलाएं, दया, और धैर्य की सराहना है, जो उन्हें सद्गुण संपन्न बनाती हैं।

भगवान शिव के मंत्र और स्तोत्र: – उनके अनुयायी विभिन्न मंत्र और स्तोत्रों का जप करके उनकी पूजा और आराधना की जाती है।

भक्तों का शिव की भक्ति में रमण करना और उनके चरित्र के अनुसरण में लगा रहना उनके अनुयायी कहलाते हैं।

शिव के तांत्रिक साहित्य में महत्व: – भगवान शिव के तांत्रिक साहित्य में उनके स्वरूप, मंत्र, और आराधना की विधान पर विचार किया जाता है।

भगवान शिव के महत्वपूर्ण लीलाएं: – भगवान शिव की लीलाएं, जैसे कि समुद्र मंथन, कामदेव का वध, और गौरी के साथ विवाह, उनके चरित्र को और भी महत्वपूर्ण बनाती हैं।