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तारीख और महत्व: गोवर्धन पूजा 2023, या अन्नकूट, 14 नवंबर को मनाई जाएगी, जिसमें भगवान कृष्ण की पूजा होती है और उन्हें 56 विभिन्न व्यंजनों का भोग चढ़ाया जाता है।

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पौराणिक कथा: गोवर्धन पूजा का महत्व भगवान कृष्ण की द्वापर युग में गोवर्धन पर्वत को उठाने की कथा से जुड़ा है, जिससे भगवान ने व्रजवासियों को बचाया।

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उत्सव की शुरुआत: गोवर्धन पूजा दीपावली के दूसरे दिन, कार्तिक शुक्ल पक्ष प्रतिपदा को मनाई जाती है, जब भगवान कृष्ण और गायों की विशेष पूजा होती है।

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भगवान कृष्ण का भोग: अन्नकूट उत्सव के दौरान, भगवान कृष्ण को 56 अलग-अलग प्रकार के व्यंजनों का भोग चढ़ाया जाता है।

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पूजा विधि: गोवर्धन पूजा की तैयारी में लोग गाय के गोबर से पर्वत बनाते हैं, उसे सजाकर भगवान कृष्ण की मूर्तियों और चित्रों के साथ सजाते हैं।

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चौराहे की सफाई: पूजा के दिन लोग अपने घरों के आंगन और चौराहे को साफ करते हैं, जो उत्सव की शुभ तैयारी में शामिल होता है।

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गुड़िया बनाना: गोवर्धन पूजा के दिन, लोग चावल के आटे और लोहड़ी से सुंदर गुड़िया बनाते हैं और उसे गाय के गोबर में रखकर पूजा करते हैं।

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दीपक रखना: गोवर्धन पर्वत की मूर्तियों के साथ, लोग गाय के गोबर में लेटे हुए कृष्ण की गुड़िया बनाकर उसकी नाभि में एक दीपक रखते हैं।

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परिक्रमा: पूजा के दौरान लोग गोवर्धन की सात बार परिक्रमा करते हैं, जिसे गोवर्धन परिक्रमा भी कहा जाता है।

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प्रदर्शनी: कई स्थानों पर गोवर्धन पूजा के दिन कृष्ण की बाल लीलाओं की विशेष प्रदर्शनी और आयोजन किए जाते हैं।

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पूजा समय: गोवर्धन या अन्नकूट पूजा 14 नवंबर 2023 को सुबह 6:43 बजे से 8:52 बजे तक होगी, जिसमें भक्त धूप, नयोध्या, फूल, और फल चढ़ाते हैं।

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संपूर्ण श्रीमद्भगवद्गीता

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