प्रज्ञा का प्रतीक: उल्लू एक प्रज्ञा का प्रतीक है और इसे बहुत बुद्धिमानता और ज्ञान का प्रतीक माना जाता है।

निश्चित चाल: उल्लू की आंखें आगे की ओर हैं जो उसको अपने शिकार को पकड़ने में मदद करती हैं और इसे एक निश्चित चाल की संकेत मिलती है।

रात्रि का राजा: उल्लू रात्रि का समय अधिकतम चार बजे के बाद अपनी शुरुआत करता है और इसलिए इसे "रात्रि का राजा" भी कहा जाता है।

मौन यात्री: उल्लू एक मौन यात्री है और इसका शिकार बिना किसी शोर शराबा के करता है।

विचारशीलता: इसकी अद्वितीय आवाज और विचारशीलता के लिए उल्लू पूरे विश्व में मशहूर है।

शिकारी और रखवाला: उल्लू अपने शिकार को पकड़ने के लिए बनाए रखवालों को भी दिखा जाता है।

शिक्षाप्रद: उल्लू को शिक्षाप्रद संकेत माना जाता है और इसलिए इसे विद्या और ज्ञान का प्रतीक माना जाता है।

रात्रि में ज्यादा सक्रिय: उल्लू रात्रि में अधिक सक्रिय रहता है और इसकी आंखों की अच्छी दृष्टि के कारण यह अपने शिकार को अच्छे से देख सकता है।

कुशल उड़ान: उल्लू एक कुशल उड़ान भी होता है और यह अपने शिकार को उच्च स्थानों से देख सकता है।

चिंगारी की रोशनी: उल्लू की आंखें रात्रि में ज्यादा चमकीली होती हैं और इसके बिना में भी यह अपने आस-पास की चीजों को देख सकता है।

पर्यावरण के लिए महत्वपूर्ण: उल्लू का मौजूदा होना पर्यावरण के संतुलन के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह कीटाणुओं और छोटे पशुओं का प्रमुख शिकारी होता है और इसकी मौजूदगी एक स्वस्थ वन्यजन्तु समुदाय की संरक्षण में मदद करती है।